शनिवार, 2 फ़रवरी 2013

thanku 'सरिता'..............

पिछले सात दिनों से जिन्दगी काफी अस्त-व्यस्त चल रही थी। न ठीक से morning  walk  ना ही exercise..... भागम-भाग लगी हुयी थी। सुबह काफी जल्दी उठने के बावजूद घर का काम निबटाकर college पहुँचने में रोज़ देर हो रही थी। बिना बात झल्लाती रहती थी। बच्चे और पति दोनों ही दुखी,  थे मेरे व्यवहार से। शायद; मैं खुद भी। कारण ......'सरिता' ( मेरी कामवाली बहनजी) का छुट्टी ले लेना। दो दिन कहकर गयी थी और आज सात दिन हो गए थे। आज सुबह-सुबह जैसे ही घर की घंटी बजी,  मेरा मन बल्लियों उछलने लगा। सरिता दरवाजे पर थी अपने बड़े-बड़े दाँतों को दिखाकर हँसती  हुयी। तुरंत उसे चाय बनाकर दी। वो बताने लगी कि देर क्यूँ हो गयी। पूछा, मैं नाराज तो नहीं? .......मैंने मन ही मन सोचा, ' इतनी  ज्यादा ख़ुशी तो शायद पति के वापस घर लौटने पर भी नहीं होती जितनी सरिता के आने पर हो रही है। तुरंत मन ही मन में उन्हें 'सॉरी' भी कह दिया। आज walk  और exercise दोनों ही कायदे से हुईं।बच्चों की पसंद का सांबर-इडली भी बना दिया, पति का हल्दी-दूध, अपना दलिया .....सब विधिवत, बिना किसी हड़बड़ी और भागमभाग के, आज college  भी टाइम पर। आज तुम्हें थैंक्स करने का दिल कर रहा है .....thanku सरिता!

6 टिप्‍पणियां:

  1. जीवन अधूरा है आज कल इनके बिना ...

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  2. ताकि आपकी मुस्कान बनी रहे - ब्लॉग बुलेटिन आज की ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  3. वास्तव में अगर किसी गृहणी का हाल चाल पूछना हो ...तो सिर्फ इतना ही काफी है,.."नौकर चाकर टाइम से आ रहे हैं न ?"

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  4. दिनांक 10/03/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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    मैं प्रतीक्षा में खड़ा हूँ....हलचल का रविवारीय विशेषांक.....रचनाकार निहार रंजन जी

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