शनिवार, 3 मार्च 2012

आई होली आई!


लो आ गयी होली,
फिर से छा गयी होली...
मतवाली बयारों संग,
मन को भा गयी होली...


लाल-गुलाबी-नीला-पीला,
रंग उड़े है चारों ओर....
नाचे बाबा देवर बन के,  
देखो नाचे जैसे  मोर ...


खाके गुझिया चढ़ाकर भंग,
देखो डाले सबपे रंग..........
होली के हुल्लारे में, 
भीगा सबका मन और अंग .....




ना कोई बैर, ना कोई दुश्मन,
भूले हर कोई अपना गम...
लग जाएँ गले एक-दूजे के, 
छाए ऐसे होली हरदम.........


अबकी रंग लगाना सबको ऐसा,
कोई और न रंगत छाए,
मतलब से भरी इस दुनिया में
बस प्यार का रंग रह जाए...... 




2 टिप्‍पणियां:

  1. उम्दा रचना है,आप को भी होली की बधाई :)

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  2. सुंदर कविता , होली की शुभकामनायें .....हैप्पी होली.....

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