रविवार, 8 अप्रैल 2012

'सरकारी विद्यालयों की दुर्दशा:सुधार हेतु सुझाव'

facebook  पर बहुत दिनों से एक message  flash   हो रहा है कि, 'हम नौकरी तो सरकारी चाहते हैं लेकिन अपने बच्चे को सरकारी स्कूल में पढ़ाना नहीं चाहते हैं'......क्यों? सवाल  अत्यंत  विचारणीय है ........और जवाब एक ही है, 'हम सरकारी कर्मचारियों का एक standard  है, लेकिन सरकारी विद्यालय उस मानक पर खरे  नहीं उतरते हैं...


ज्यादा पुरानी बात नहीं है, आज से लगभग १५ साल पहले तक सरकारी विद्यालयों की स्थिति इतनी बुरी नहीं थी, लोगों के विचार थे कि जितने भी IAS ,IPS ,PCS अधिकारी हैं, सब सरकारी विद्यालयों से ही पढ़कर बने हैं, हाँलाकि; ये धारणा आज भी कायम है..... फिर; कारण क्या है? हम क्यों नहीं पढ़ाते अपने बच्चों को वहां? क्या private schools  में teachers  ज्यादा qualified  हैं? नहीं....ऐसा कुछ भी नहीं है....जो स्तर teachers  का govt .colleges  में है वह private  में कहीं नज़र भी नहीं आता..हाँ! यदि कुछ नज़र आता है तो वह है वहां का hardwork ,अच्छी सी बिल्डिंग, glamour और इंग्लिश....इसके अलावा guardians  को भाता है.....जितनी ज्यादा फीस उतना अच्छा स्कूल, जितना ज्यादा स्कूल का टाइम उतना अच्छा ही वह स्कूल,और फिर swimming ,games ,और summer camps .....अब ये धारणा मनो-मस्तिष्क पर काफी गहरे पैठ चुकी है, और हर समर्थ अविभावक ज्यादा फीस और भीड़ वाले स्कूल में अपने बच्चे का दाखिला करवाना चाहते हैं.....


अभी हम समझ नहीं रहे हैं कि यदि इन प्राइवेट schools  की कुक्कुर्मुत्ता पैदावार को नहीं रोका गया तो इसके क्या भयंकर परिणाम हमारी आगे आने वाली पीढ़ी को भुगतने  पड़ेंगे .....आज एक बच्चे की पढाई यदि शहर के किसी अच्छे {अविभावक की दृष्टि में} प्राइवेट स्कूल में करवाई जाती है तो कम-से-कम एक लाख रूपया सालाना लगता है ...यदि किसी के दो बच्चे हैं तो दो लाख और यदि उसकी सालाना कमाई पांच लाख रूपए है तो उसे दो लाख में अपना घर चलाना है और एक लाख रूपया भविष्य के लिए बचकर रखना है यदि उसे अपने बच्चो को आगे डॉक्टर,इंजीनियर या फिर MBA  कराना है....यानि शादी करने के बाद से उसे अपने बच्चों के लिए ही जीना है...वरना? और अगर इतनी कमाई में सब संभव नहीं है और आकान्छाएं ज्यादा  हैं तो लाख कोशिशों के बाद भी इस देश से भ्रष्टाचार और घूसखोरी नहीं ख़तम हो सकती....सरकार तो यही चाहती है कि ऐसे schools  और ज्यादा तादात में खुलते ही रहें क्योंकि यहाँ उसकी कमाई है...


तो फिर; क्या हो? इस बढ़ते हुए  शिक्षा के खेल में कैसे सही ढंग दुबारा लाया जाए? कैसे फिर से सरकारी विद्यालयों की पढाई का स्तर सुधारा जाए? मेरी नज़र में इसका एक तरीका है; वह यह कि सरकार यह नियम बना दे कि "  हर सरकारी कर्मचारी का बच्चा सरकारी स्कूल में ही पढ़ेगा".......आप देखिएगा उसी दिन से सभी सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता अपने आप ही अभूतपूर्व ढंग से सुधर जाएगी....जब शिक्षा-विभाग के आला अधिकारियों के बच्चे सरकारी विद्यालयों में पढने जायेगे तो वह दिन दूर नहीं कि सरकार को और अधिक विद्यालय खोलने पड़ जायेंगे और वापस लौटेगा सरकारी विद्यालयों की वही पुरानी शान ............जहाँ से पढ़ा हुआ बच्चा ही आज ज्यादातर अधिकारी की कुर्सी को सुशोभित कर रहा है.... 










sarkar

बुधवार, 4 अप्रैल 2012

'आओ खेलें भ्रष्ट-भ्रष्ट'

चलो आज नेता बन जाएँ 
फिर इस देश की बैंड बजाएँ;
सबको कर दें त्रस्त-त्रस्त
'आओ खेलें भ्रष्ट-भ्रष्ट'....


एक घोटाला तुम करो 
फिर एक घोटाला मैं करूं;
अखबारों में छपे सुर्खियाँ 
see -saw see -saw हम करें....


कसम खाएँ माँ-बाप की
एक 'प्रेस कांफ्रेंस' करें;
खेल चले बराबर का 
मिल-बाँट रुपैया हजम करें....


मढ़कर दोष किसी माथे पर
अपनी छवि उजली बनवाकर ;
कितने ही murder करवाकर 
कर दें सब कुछ अस्त-व्यस्त.....


देश का करके बंटाधार
खुद ही बन जाएँ कर्णधार;
हम तो हो जाएँ मस्त-मस्त
आओ; फिर खेलें भ्रष्ट-भ्रष्ट.....







रविवार, 11 मार्च 2012

"r u there "?......

मेरे inbox  में पड़ा तुम्हारा सन्देश.......
'क्या हुआ
r  u there "?.....
"where r u ????????"
आज मुझे चिढ़ा रहा है,
खूब रुला रहा है,
जितनी पीड़ा ताउम्र  नहीं मिली,
उससे ज्यादा आज तड़प
एक पल में पा ली....
जीवन भर न मिट पानेवाली
ग्लानि पा ली.....


मैं रुक न सकी दो पल,
और तुम इतनी आगे निकल गए...
मेरे उत्तर की प्रतीक्षा भी न कर सके?
मेरा जवाब तो सुन लेते,
जाते-जाते कुछ तो कह जाते .
आज बार-बार मैं msg कर रही हूँ..
'क्या हुआ, r u there ?'
कोई जवाब नहीं...
अब; कभी कोई जवाब नहीं...
जीवन भर पूछती ही रह जाऊँगी
पर अब कभी कोई जवाब न पाऊँगी 
क्यों न इंतज़ार कर सकी उस पल
और अब इंतज़ार हर पल
अविराम........



शनिवार, 3 मार्च 2012

आई होली आई!


लो आ गयी होली,
फिर से छा गयी होली...
मतवाली बयारों संग,
मन को भा गयी होली...


लाल-गुलाबी-नीला-पीला,
रंग उड़े है चारों ओर....
नाचे बाबा देवर बन के,  
देखो नाचे जैसे  मोर ...


खाके गुझिया चढ़ाकर भंग,
देखो डाले सबपे रंग..........
होली के हुल्लारे में, 
भीगा सबका मन और अंग .....




ना कोई बैर, ना कोई दुश्मन,
भूले हर कोई अपना गम...
लग जाएँ गले एक-दूजे के, 
छाए ऐसे होली हरदम.........


अबकी रंग लगाना सबको ऐसा,
कोई और न रंगत छाए,
मतलब से भरी इस दुनिया में
बस प्यार का रंग रह जाए...... 




बुधवार, 22 फ़रवरी 2012

शादी की " expiery "

शादी की  " expiery "......शीर्षक पढ़कर अजीब सा लगा न!....लेकिन क्या करें, कल हमारी एक परिचित खूब सज-धजकर हमारे घर आयीं थीं..हमने उनसे यूँ ही पूछ लिया, "भाभीजी! भाईसाहेब नहीं आये"? वह ठठाकर हँस पड़ी और बोली, "क्या हमेशा साथ में ही आया-जाया जाता है? अरे! शादी की भी expiery  date होती है". उस समय तो मैं आवाक उन्हें देखती रह गयी लेकिन उनके जाने के बाद सोचा, " अरे! जैसे शादी कोई  product हो, जिसकी expiery  हो? लेकिन अगले ही पल दिमाग ने कहा,  गलत ही क्या कह रही थी.......भई!  शादी-शुदा जिंदगी में हमेशा एक सा मामला तो रहता नहीं, बदलाव तो आ ही जाते हैं. लेकिन 'expiry '? नहीं.... यहाँ भी परिवर्तन लाया जाना चाहिए..'best before '....यह ठीक रहेगा..




 तो अब आप जब भी किसी की शादी का निमंत्रण-पत्र  पायें तो समझ लें कि किसी product का विज्ञापन है..जिसमें शादी कि तिथि उसकी manufacturing date है और जिसमें 'best before' invisible .....लेकिन है अवश्य .

गुरुवार, 9 फ़रवरी 2012

जीने की कला ....oolong tea

आज आप सबके साथ बचपन में अंग्रेजी में पढ़ी एक कहानी share करना चाहती हूँ.....'oolong tea '.....यदि अच्छी लगे तो अपने अमूल्य विचार अवश्य व्यक्त करियेगा........


एक बार की बात है. एक लड़की अपनी माँ के पास अत्यंत उदास भाव से आकर बोली..."माँ! मेरे जीवन में जैसे समस्याओं की झड़ी लगी हुई है, एक समाप्त नहीं होती कि दूसरी मुँह बाए सामने आकर खड़ी हो जाती है. मुझे समझ नहीं आ रहा है कि मैं किस प्रकार इनका सामना करूँ? कभी-कभी तो मेरा मर जाने का मन करता है..अब जीवन से राग भी समाप्त होता जा रहा है, लगता है जैसे पत्थर हो गयी हूँ..अब मुझसे स्थिति  नहीं संभाली जाती है. मैं क्या करूँ?"....................

बेटी की बात सुनकर माँ अत्यंत धीरज के साथ उसके सर पे हाँथ फेरती हुई उसे रसोईघर की ओर ले चली..वहां उसने गैस के तीनों चूल्हे जलाकर तीन भगोने में तेज आँच पर पानी चढ़ा दिया..जैसे ही पानी उबलने लगा उसने एक भगोने में गाजर, दूसरे में अंडे और तीसरे में उलोंग चाय डाल दिया  और बिना एक भी शब्द बोले चुपचाप वहीँ बैठ गयी.........

लगभग बीस मिनट बाद उसने गैस बंद कर दी और एक कटोरी में गाजर, दूसरी में अंडे और तीसरी में चाय रखकर अपनी बेटी से पूछा.."तुमने क्या देखा?"

"गाजर,अंडे और चाय"...उसने जवाब दिया.

उसकी माँ उसके पास गाजर की कटोरी लेकर आई और उसे छूने के लिए कहा..उसने छूकर देखा की गाजर एकदम मुलायम हो चुकी है..अब उसकी माँ ने उसको एक अंडे को छीलने  के लिए कहा..उसने पाया कि छिलके के अन्दर अंडा द्रव से कठोर हो चुका है ..

अंत में उसकी माँ नें उसे उलोंग चाय पीने के लिए कहा ...उस चाय कि खुशबू और स्वाद से उसके उदास चेहरे पर एक मुस्कराहट तैर गयी, उसे उसका स्वाद बहुत अच्छा लगा ..चाय का घूँट भरकर उसने अपनी माँ से पूछा, 'माँ इन सबका क्या मतलब है? कृपया मुझे बताइए?"

माँ अत्यंत अर्थपूर्ण मुस्कराहट के साथ बोली,"बेटी! तुमने देखा की गाजर,अंडे और उलोंग ; तीनों ने ही एक जैसी ही  परिस्थिति का सामना किया..तीनों ने खौलते पानी को महसूस किया, लेकिन तीनों की प्रतिक्रिया  भिन्न थी ...."गाजर"...जो बड़ी कड़ी और मजबूत नज़र आ रही थी; खौलते पानी में पड़कर वह नरम और धीरे-धीरे लुचलुचा गयी,.........वहीँ "अंडा"....जो ज़रा सी असावधानी से  बेकार हो जाता है, उसका बाहरी कठोर  आवरण उसके अन्दर के द्रव को संभाले रखता है; वह खौलते पानी में पड़कर अन्दर से एकदम कड़ा हो गया और उसका छिलका नरम.........लेकिन उलोंग चाय तो सबसे अलग थी . जैसे ही खौलते पानी के संपर्क में वह आई उसने पानी का रंग ही बदल दिया, उसका स्वाद बाधा दिया और अपनी खुशबू चारों तरफ वातावरण में फैला दी" ......

"अब तुम बताओ कि  जीवन में समस्यां  आने पर तुम कैसे व्यवहार करोगी  .....गाजर,अंडा या उलोंग जैसा"?

लड़की स्वयं को अंडे की जगह रखकर सोचती है कि यदि मैं गाजर जैसे व्यवहार करूंगी तो मुसीबतों का सामना करते ही  एक दिन अत्यंत कमजोर  हो जाउंगी  और अपनी आन्तरिक शक्ति गवां बैठूंगी .और बाहर से भी एकदम कमजोर दिखने लगूंगी.....

यदि मैं  अंडे  जैसे नरम दिल  ही रहती हूँ तो जीवन में  सब अच्छा है, लेकिन  जैसे ही मुसीबतें ,बीमारी या पैसे की  तंगी आएगी  तो मैं  बाहर से तो वैसे ही दिखूंगी  , लेकिन अन्दर ही अन्दर एकदम कठोरह्रदय हो जाऊंगी और अन्दर की जिजीविषा,नरमता समाप्त हो जाएगी .....

और यदि मैं उलोंग जैसे रहती हूँ तो जीवन में आने वाली तकलीफों को अत्यंत सकारात्मक ढंग से लूंगी..और समस्याओं का सामना ख़ुशी -ख़ुशी कर सकूंगी ....हर नकारात्मकता को सकारात्मकता से ले सकूंगी..जीवन जीने के लिए है ..लेकिनं जीना एक कला है...जैसे चाय खौलते पानी में उबल-उबलकर अपनी खुशबू से दूसरों को आकर्षित कर लेती है और लोग  उसको पिए बिना नहीं रह पाते  उसी प्रकार जीवन में तकलीफों के मध्य जो अपनी जिजीविषा को नहीं छोड़ता है लोग उसी का सम्मान करते हैं;स्नेह देते हैं....

वह लड़की सब कुछ समझ जाती है और ख़ुशी-ख़ुशी अपनी माँ से कसकर लिपट जाती है ..सच है जीवन में हर समय खुशियाँ ही खुशियाँ हो ये संभव नहीं लेकिन हम अपनी आन्तरिक ताकत और गुणों से दुखों  को ख़ुशी-ख़ुशी सहन तो कर ही सकते हैं और दूसरों को भी खुश रख सकते हैं..जीवन अनमोल है..जिसे हँसते हुए जीना चाहिए न कि रोते हुए .....तभी तो जब हम अंतिम यात्रा पर आँख बंद किये मुस्करा रहे होंगे तब हमारे चारों तरफ लोग हमारी बात करके रो रहे होंगे......

रविवार, 5 फ़रवरी 2012

तुम्हें क्या-क्या बना दूं....

तुम अभी 10th  का exam  देने जा रहे हो..रात-दिन बस तुम्हारे ही बारे में सोचती रहती हूँ..जीवन में जैसे बस तुम्ही रह गए हो आजकल..तुम कैसे पढ़ो कि; तुम्हारे अच्छे marks  आ जाएँ..आगे कौन सी line  में जाना है..तुम कौन सा carrier चुनोगे..तुम क्या बनोगे.. तुम्हें maths  में रूचि नहीं; 'हाय राम! अब क्या होगा?' बिना गणित तुम क्या करोगे? उसकी field तो बहुत बड़ी है. फिर? अच्छा तुम biology  लेना चाहते हो..चलो ठीक है..अब तो तुम्हारे पास सीमित field है...चलो ऐसे तैयारी करो कि 10th  में 100 % तो ले ही आओ..अच्छा चलो थोडा discount ...लेकिन पढ़ो तो!.......

अच्छा!!! अगर तुम डॉक्टर बनना चाहते हो तो कौन सा interance  exam  दोगे?.. कौन सी को coaching  में डालू तुम्हे?  उफ़! कौन से डॉक्टर बनोगे? orthopedic ? हाँ! ये सही रहेगा...मुझे हड्डियों की बहुत problem  है...

फिर सोचती हूँ कि क्या इतनी मेहनत कर पाओगे ? इतने नाज़ुक से मेरे लाडले हो....अच्छा ऐसा करती हूँ कि तुम्हे कुछ और बना देती हूँ, जैसे "lecturer "....हाँ! यह  थोड़ी आराम की नौकरी रहेगी...तुम्हे music  का भी शौक है...इस नौकरी के साथ वह भी पूरा हो जाएगा ...लेकिन पढ़ो तो सही...अच्छे marks  आयेंगे तभी तो आगे कुछ होगा...

एक अकेले तुम......... तुम्हे जाने क्या-क्या बना देना चाहती हूँ....सिर्फ मैं ही तुम्हे नहीं बल्कि हर तुम्हारी age -group  वाले बच्चे की माँ शायद इस समय इसी सपने को देख रही है, क्योंकि तुम्ही लोग हो हमारा सम्मान हो .हमारा 'अस्तित्व' हो ...तुमसे कुछ माँग थोड़े ही रही हूँ.तुम तो दोगे ही ये सम्मान..कुछ भी बनो अपनी ईमानदारी और मेहनत से बनो ..हम हमेशा तुम्हारे साथ हैं...