रविवार, 12 अगस्त 2012

''इस प्यार को क्या नाम दूं?"

             कल सबने समाचार सुना ही होगा कि,  आगरा में इंजीनयरिंग के एक छात्र ने अपने घर के सामने, अपने ही परिवारवालों की आँखों के समक्ष खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली ............कारण., किसी लड़की के प्रेम में थे वे सज्जन ...और उस लड़की ने उनसे शादी के लिए इनकार कर दिया था .....हद्द है .........एक इतनी जवान और अपेक्षित जिन्दगी को उस लड़के ने एक इनकार के कारण समाप्त कर दिया ......जिस मक़ाम , जिस बुलंदी को पाने के लिए वह इतने महंगे कॉलेज से पढाई कर रहा था, वह लक्ष्य उस समय कैसे उसकी आँखों और मन से धूमिल हो गया?  अपने जीवन से अपने बूढ़े भविष्य की आस लगाये अपने मा-बाप के जीवन का ख्याल भी नहीं आया उसे ? उसने ये भी ना सोचा कि  ,,,  उसकी जिन्दगी की समाप्ति तो उसके मा-बाप को भी बेमौत मार डालेगी....... एक साथ इतनी मृत्यु !!!  हे भगवान्! क्या प्यार इतना हिंसक भी हो सकता है? अगर हाँ: तो ये प्यार नहीं.....सिर्फ जिद्द है ...जिद्द है समय-समय पर दूसरी-दूसरी चीजों को प्राप्त करने की.............बचपन में मा-बाप से करी हुई  जिद्द जवानी में भी कुछ लोगों के दिमाग पर अधिकार करे रहती है ,,,जिसके दुष्परिणाम इस रूप में सामने आते हैं.........

             ये प्यार नहीं है ...........प्यार तो जीवन में सहनशक्ति, समझोता, आगे बढ़ने की प्रेरणा और विभिन्न जिम्मेदारियों का एहसास कराने वाला वह सशक्त भाव है जिसके चलते व्यक्ति लोगों के सामने एक उदहारण बन सकता है ......लेकिन उस युवक की तरह नहीं.. ...उसे तो ये सोचना चाहिए था की मैं उस कमी को अपने जीवन से दूर करके उस लड़की के सामने ऐसा उदहारण प्रस्तुत करूंगा कि उसको अपने निर्णय पर सारी जिन्दगी अफ़सोस रहेगा ...अगर प्यार में निराश होकर इसी तरह युवक और युवतियां जान लेते और देते विधाता को भी दुःख होगा  कि उसने ये भाव इंसान के मन में पैदा ही क्यों किया जिसके महत्त्व को वह समझ ही नहीं पा रहे ?
                   
                        

8 टिप्‍पणियां:

  1. सच में यह प्यार नहीं है !
    सही विश्लेषण !

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  2. ऐसे लोग ही प्यार को बदनाम करते हैं .... अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड कर

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  3. Bahut afsos hota hai aise samchar sun ker, na jane aaj ke yuva pidhi ko kya ho gya hai , uske naitik mulyo ka haas ho chuka hai shayad, use sirf aur sirf apne baren me chinta hai ********wo kisi ke baren me nahi sochta.yahan tak ki apne Mata- pita ke baren me bhi........dhikkar hai aisi yuva pidhi per ************
    behtreen aur sarthak lekh

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  4. kahin padha
    क्या प्यार महज fun है
    सैर सपाटे व खेल-कूद जैसा
    पर Pshcyologist कहते हैं
    प्यार रूपी fun जानने वाले
    लम्बी उम्र जीते हैं..:)

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    1. अब इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है? प्यार ''fun '' नहीं है ''सर''..........क्यों ''मस्ती'' को प्यार का नाम देकर प्यार के नाम को कलंकित किया जाए?

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  5. बिलकुल सही विश्लेष्ण किया है ....... वैसे भी जीवन सिर्फ अपने लिए ही नही होता है ... इस पर परिवार और समाज दोनों का भी अधिकार होता है .... आत्महत्या करनेवाले खुद तो एक पल में अपनी ज़िन्दगी समाप्त कर लेते हैं ,पर अपने पीछे अपने अपनों को हर पल मरने के लिए छोड़ जाते हैं ........

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  6. प्यार तो जीवन में सहनशक्ति, समझौता ,आगे बढ़ने की प्रेरणा
    और
    विभिन्न जिम्मेदारियों का एहसास कराने वाला
    वह सशक्त भाव है ,
    जिसके चलते व्यक्ति लोगों के सामने एक उदहारण बन सकता है ....
    सच्ची बात .... !

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